पर निश्चित रूप से बढ़ रहा है। यहां प्रायः हर दूसरे पुरूष अथवा स्त्री ने मेरे पास आकर मेरे कार्य के संबंध में बातचीत की।...मेरा विचार है कि मैं धीरे-धीरे उस अवस्था की ओर बढ़ रहा हूं, जहां खुद शैतान को भी अगर वह हो तो मैं प्यार कर सकूंगा।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 352)
और वे श्रीमती ओलिबुल को लिखते हैं, ‘‘अंगे्रज़ जाति अत्यन्त उदार है। उस दिन करीब तीन मिनट के अंदर ही आगामी सर्दी में कार्य संचालनार्थ नवीन मकान के लिए मेरी
पर निश्चित रूप से बढ़ रहा है। यहां प्रायः हर दूसरे पुरूष अथवा स्त्री ने मेरे पास आकर मेरे कार्य के संबंध में बातचीत की।...मेरा विचार है कि मैं धीरे-धीरे उस अवस्था की ओर बढ़ रहा हूं, जहां खुद शैतान को भी अगर वह हो तो मैं प्यार कर सकूंगा।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 352)
और वे श्रीमती ओलिबुल को लिखते हैं, ‘‘अंगे्रज़ जाति अत्यन्त उदार है। उस दिन करीब तीन मिनट के अंदर ही आगामी सर्दी में कार्य संचालनार्थ नवीन मकान के लिए मेरी