थी। हमारे राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन में उसकी वही भूमिका है जो चीन की क्रांाति में बी व्योवन की। उसने क्रांातिकारी आंदोलन को संगठित करने में अपना जीवन अर्पित कर दिया। खेद है कि हम ह्मूमों, एनी बेसेन्ट और ऐडियों को तो, जो मित्र के वेश में शत्रु थे, श्रद्वांजलि अर्पित करते हैं, पर जिस निवेदिता ने हमारी गुलामी की जंजीरें तोड़ने के लिए प्राण होम दिए, उसे हमने भुला दिया है। विवेकानन्द को अमेरिका से जो कोमलतम सहानुभूति प्राप्त
थी। हमारे राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन में उसकी वही भूमिका है जो चीन की क्रांाति में बी व्योवन की। उसने क्रांातिकारी आंदोलन को संगठित करने में अपना जीवन अर्पित कर दिया। खेद है कि हम ह्मूमों, एनी बेसेन्ट और ऐडियों को तो, जो मित्र के वेश में शत्रु थे, श्रद्वांजलि अर्पित करते हैं, पर जिस निवेदिता ने हमारी गुलामी की जंजीरें तोड़ने के लिए प्राण होम दिए, उसे हमने भुला दिया है। विवेकानन्द को अमेरिका से जो कोमलतम सहानुभूति प्राप्त