इत्यादि। धर्म का अर्थ है वेदान्त, उसका विभिन्न राष्ट्रों के विभिन्न प्रयोजन परिवेश एवं अन्यायअवस्थाओं के अनुसार विभिन्न रूपों में बदलता ही रहेगा...’’ (वही, पृष्ठ 283)
इससे मन में जो उछाह, उत्साह उत्पन्न हुआ था, उसे मेरी हेल के नाम मई, 1896 के पत्र में लिखा हैः
‘‘मैं सब कुछ नवीन देखना चाहता हूं। पुराने ध्वंसावशेष के चारों ओर आलसी की तरह चक्कर लगाना, अतीत इतिहासों को लेकर सारा जीवन हाय-हाय करना तथा प्राचीन काल के लोगों
इत्यादि। धर्म का अर्थ है वेदान्त, उसका विभिन्न राष्ट्रों के विभिन्न प्रयोजन परिवेश एवं अन्यायअवस्थाओं के अनुसार विभिन्न रूपों में बदलता ही रहेगा...’’ (वही, पृष्ठ 283)
इससे मन में जो उछाह, उत्साह उत्पन्न हुआ था, उसे मेरी हेल के नाम मई, 1896 के पत्र में लिखा हैः
‘‘मैं सब कुछ नवीन देखना चाहता हूं। पुराने ध्वंसावशेष के चारों ओर आलसी की तरह चक्कर लगाना, अतीत इतिहासों को लेकर सारा जीवन हाय-हाय करना तथा प्राचीन काल के लोगों