योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

की बातों का चिंतन कर निराशा के दीर्घश्वास छोड़ने के लिए मैं कतई तैयार नहीं हूं। मेरे खून में जो जोश है, उसके कारण ऐसा करना मेरे लिए सम्भव नहीं। समस्त भावनाओं को प्रकाश में लाने के लिए उपयुक्त स्थान पात्र तथा सुयोग्य सुविधाएं एकमात्र अमेरिका ही मेें हैं। और मैं भी आमूलचूल यह देखना चाहता हूं कि परिवर्तन विरोधी ‘जेली’ मछली की शिथिलता उस विराट पुंज के लिए मुझसे कुछ हो सकता है या नहीं? मैं उन प्राचीन संस्कारों को दूर हटाकर


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की बातों का चिंतन कर निराशा के दीर्घश्वास छोड़ने के लिए मैं कतई तैयार नहीं हूं। मेरे खून में जो जोश है, उसके कारण ऐसा करना मेरे लिए सम्भव नहीं। समस्त भावनाओं को प्रकाश में लाने के लिए उपयुक्त स्थान पात्र तथा सुयोग्य सुविधाएं एकमात्र अमेरिका ही मेें हैं। और मैं भी आमूलचूल यह देखना चाहता हूं कि परिवर्तन विरोधी ‘जेली’ मछली की शिथिलता उस विराट पुंज के लिए मुझसे कुछ हो सकता है या नहीं? मैं उन प्राचीन संस्कारों को दूर हटाकर


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