नवीन रूप से प्रारम्भ करना चाहता हूं-एकदम सम्पूर्ण नवीन, सरल किन्तु साथ ही साथ सबल सद्यजात शिशु की तरह नवीन तथा सतेह।’’ (वही, पृष्ठ 406)
मतलब यह है कि विवेकानन्द अपने भीतर जो आग लेकर गए थे, पाश्चात्य विज्ञान के सम्पर्क में आकर वह प्रचण्ड से प्रचण्डतर हो उठी, उसने श्वेत शिखा का रूप धारण कर लिया।
इस श्वेत अग्निशिखा को हृदय में धारण किए वे इंग्लैंड में रोम होते हुए 1897 के आरम्भ में स्वदेश लौटे।
वेदान्त और विश्व-बंधुत्व
नवीन रूप से प्रारम्भ करना चाहता हूं-एकदम सम्पूर्ण नवीन, सरल किन्तु साथ ही साथ सबल सद्यजात शिशु की तरह नवीन तथा सतेह।’’ (वही, पृष्ठ 406)
मतलब यह है कि विवेकानन्द अपने भीतर जो आग लेकर गए थे, पाश्चात्य विज्ञान के सम्पर्क में आकर वह प्रचण्ड से प्रचण्डतर हो उठी, उसने श्वेत शिखा का रूप धारण कर लिया।
इस श्वेत अग्निशिखा को हृदय में धारण किए वे इंग्लैंड में रोम होते हुए 1897 के आरम्भ में स्वदेश लौटे।
वेदान्त और विश्व-बंधुत्व