इत्िाफाक की बात है कि इन्हीं दिनों धर्म-महासभा के अध्यक्ष बरोज भी ईसाई धर्म का प्रचार करने भारत आए। पर वे असफल लौटे। विवेकानन्द अपने इसी पत्र में लिखते हैं:
‘‘मुझे आशा है कि डाक्टर बरोज इस समय अमेरिका पहुंच गए होंगे। बेचारे! वे यहां अति कट्टर ईसाई धर्म का प्रचार करने आए थे, और जैसा होता है, किसी ने उनकी न सुनी। इतना अवश्य है कि उन्होंने पे्रमपूर्वक उनका स्वागत किया, परन्तु वह मेरे पत्र के कारण ही था। मैं उनको बुद्वि
इत्िाफाक की बात है कि इन्हीं दिनों धर्म-महासभा के अध्यक्ष बरोज भी ईसाई धर्म का प्रचार करने भारत आए। पर वे असफल लौटे। विवेकानन्द अपने इसी पत्र में लिखते हैं:
‘‘मुझे आशा है कि डाक्टर बरोज इस समय अमेरिका पहुंच गए होंगे। बेचारे! वे यहां अति कट्टर ईसाई धर्म का प्रचार करने आए थे, और जैसा होता है, किसी ने उनकी न सुनी। इतना अवश्य है कि उन्होंने पे्रमपूर्वक उनका स्वागत किया, परन्तु वह मेरे पत्र के कारण ही था। मैं उनको बुद्वि