योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

तो नहीं दे सकता था! इसके अतिरिक्त वे कुछ विचित्र स्वभाव के व्यक्ति थे। मैंने सुना है कि मेरे भारत आने पर राष्ट्र ने जो खुशी मनाई, उससे जलन के मारे वे पागल हो गए थे। कुछ भी हो, तुम लोगों को उनसे बुद्विमान व्यक्ति भेजना उचित था क्योंकि डा. बरोज के कारण हिन्दुओं के मन में धर्म प्रतिनिधि सभा एक स्वांग-सी बन गई है। अध्यात्म विद्या के संबंध में पृथ्वी का कोई भी राष्ट्र हिन्दुओं का मार्ग प्रदर्शन नहीं कर सकता और विचित्र बात


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तो नहीं दे सकता था! इसके अतिरिक्त वे कुछ विचित्र स्वभाव के व्यक्ति थे। मैंने सुना है कि मेरे भारत आने पर राष्ट्र ने जो खुशी मनाई, उससे जलन के मारे वे पागल हो गए थे। कुछ भी हो, तुम लोगों को उनसे बुद्विमान व्यक्ति भेजना उचित था क्योंकि डा. बरोज के कारण हिन्दुओं के मन में धर्म प्रतिनिधि सभा एक स्वांग-सी बन गई है। अध्यात्म विद्या के संबंध में पृथ्वी का कोई भी राष्ट्र हिन्दुओं का मार्ग प्रदर्शन नहीं कर सकता और विचित्र बात


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