धूम-धाम हुए बिना उनके (श्री रामकृष्ण के) नाम से लोग कैसे परिचित होंगे, और उनसे प्रेरित कैसे होंगे? इतना स्वागत-सम्मान क्या मेरे लिए किया गया है? नहीं, यह तो उन्हीं के नाम का जय-जयकार हुआ है। उनके बारे में जानने की लोगों के मन में कितनी इच्छा जाग्रत हुई है। जब लोग क्रमशः जानेंगे तभी तो देश का मंगल होगा, जो देश के मंगल के लिए आए हैं, उनको जाने बिना देश का मंगल किस प्रकार होगा? उनको ठीक-ठीक जान लेने से ‘मनुष्य’ तैयार होंगे। और ‘मुनष्य’ यदि तैयार हो गए,
धूम-धाम हुए बिना उनके (श्री रामकृष्ण के) नाम से लोग कैसे परिचित होंगे, और उनसे प्रेरित कैसे होंगे? इतना स्वागत-सम्मान क्या मेरे लिए किया गया है? नहीं, यह तो उन्हीं के नाम का जय-जयकार हुआ है। उनके बारे में जानने की लोगों के मन में कितनी इच्छा जाग्रत हुई है। जब लोग क्रमशः जानेंगे तभी तो देश का मंगल होगा, जो देश के मंगल के लिए आए हैं, उनको जाने बिना देश का मंगल किस प्रकार होगा? उनको ठीक-ठीक जान लेने से ‘मनुष्य’ तैयार होंगे। और ‘मुनष्य’ यदि तैयार हो गए,