योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘‘मैं यह परीक्षा कर रहा था कि अगर मैं जाति-भेद न मानूं तो मेरा क्या होगा।’’ बाप ने सस्नेह बेटे की ओर देखा और वह मुस्कराते हुए पठन कक्ष में चले गए।

लगातार रामायण और महाभारत सुनते-सुनते नरेन्द्र को उनका बहुत-सा भाग

18 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

कंठस्थ हो गया था। कथा के समय वह कई बार इन्हें अपने बल मधुर स्वर में श्रोताओं को सुनाता तो बहुत ही भला लगता। उसने भिक्षुक-गायकों से राधाकृष्ण और सीताराम की लीला संबंधी कितने


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‘‘मैं यह परीक्षा कर रहा था कि अगर मैं जाति-भेद न मानूं तो मेरा क्या होगा।’’ बाप ने सस्नेह बेटे की ओर देखा और वह मुस्कराते हुए पठन कक्ष में चले गए।

लगातार रामायण और महाभारत सुनते-सुनते नरेन्द्र को उनका बहुत-सा भाग

18 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

कंठस्थ हो गया था। कथा के समय वह कई बार इन्हें अपने बल मधुर स्वर में श्रोताओं को सुनाता तो बहुत ही भला लगता। उसने भिक्षुक-गायकों से राधाकृष्ण और सीताराम की लीला संबंधी कितने


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