ही गाने सीख लिए थे। जब वह इन्हें अपने मधुर स्वर में गाता तो सुननेवाले मुग्ध हो उठते। उसे सभी का लाड़-प्यार प्राप्त था। उसपर किसी तरह का कठिन नियंत्रण न था। घर का वातावरण चाहे धार्मिक था, पर किशोर नरेन्द्र की स्वच्छंदता और स्वाधीनता पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं था।
नरेन्द्र को रामायण का हनुमान बहुत पसन्द था। उसके अलौकिक कार्याें की कथाएं मन लगाकर सुनता था। फिर मां ने उसे बताया कि हनुमान अमर हैं और अब भी जीवित हैं। तब
ही गाने सीख लिए थे। जब वह इन्हें अपने मधुर स्वर में गाता तो सुननेवाले मुग्ध हो उठते। उसे सभी का लाड़-प्यार प्राप्त था। उसपर किसी तरह का कठिन नियंत्रण न था। घर का वातावरण चाहे धार्मिक था, पर किशोर नरेन्द्र की स्वच्छंदता और स्वाधीनता पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं था।
नरेन्द्र को रामायण का हनुमान बहुत पसन्द था। उसके अलौकिक कार्याें की कथाएं मन लगाकर सुनता था। फिर मां ने उसे बताया कि हनुमान अमर हैं और अब भी जीवित हैं। तब