जो कुछ भी मैं करता हूं, उसको समझाने के लिए मैं तुमको कल्पना द्वारा भारत ल चलूंगा। विषय के सभी ब्योरों और सूच्म विवरणों में जाने का समय नहीं है, और न एक विशेष जाति की सभी जटिलताओं को इस अल्प समय में समझ पाना तुम्हारे लिए सम्भव है। इतना कहना ही पर्याप्त होगा कि मैं कम से कम भारत की एक लघु रूप-रेखा तुम्हारे सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा।’’
अपने ही देश में ऐसे बुद्विजीवियों की कमी नहीं, मैकाले की औपनिवेशिक शिक्षा द्वारा जिनका अभारतीयकरण हो चुका है,
जो कुछ भी मैं करता हूं, उसको समझाने के लिए मैं तुमको कल्पना द्वारा भारत ल चलूंगा। विषय के सभी ब्योरों और सूच्म विवरणों में जाने का समय नहीं है, और न एक विशेष जाति की सभी जटिलताओं को इस अल्प समय में समझ पाना तुम्हारे लिए सम्भव है। इतना कहना ही पर्याप्त होगा कि मैं कम से कम भारत की एक लघु रूप-रेखा तुम्हारे सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा।’’
अपने ही देश में ऐसे बुद्विजीवियों की कमी नहीं, मैकाले की औपनिवेशिक शिक्षा द्वारा जिनका अभारतीयकरण हो चुका है,