योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

और वे इस धरती पर रहते हुए विदेशी बने हुए हैं। वे विवेकानन्द हो चुका है, और वे इस धरती पर रहते हुए विदेशी बने हुए हैं। वे विवेकानन्द के दर्द को क्या जानें, उनके उद्देश्य को क्या समझे? जब वे देश को देश ही नहीं मानते तो उसके हज़ारों साल के जीवन की जटिलताओं, उसकी समस्याओं से उन्हें क्या मतलब ? विषय था ‘मेरा जीवन’, पर

114 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

विवेकानन्द अपने विदेशी श्रोताओं को बता रहे थे:

‘‘भारत खंडहरों में ढेर


552 of 1197

और वे इस धरती पर रहते हुए विदेशी बने हुए हैं। वे विवेकानन्द हो चुका है, और वे इस धरती पर रहते हुए विदेशी बने हुए हैं। वे विवेकानन्द के दर्द को क्या जानें, उनके उद्देश्य को क्या समझे? जब वे देश को देश ही नहीं मानते तो उसके हज़ारों साल के जीवन की जटिलताओं, उसकी समस्याओं से उन्हें क्या मतलब ? विषय था ‘मेरा जीवन’, पर

114 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

विवेकानन्द अपने विदेशी श्रोताओं को बता रहे थे:

‘‘भारत खंडहरों में ढेर


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