से वह उसे देखने के लिए बड़ा उत्सुक था। पर देखे तो कहां देखे। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। एक दिन वह कथा सुनने गया तो कथाकार पंडित अपनी अलंकारिक भाषा में हास्य-रस मिलाकर हनुमान के चरित्र का वर्णन कह रहा था। नरेन्द्र के मन में जाने क्या आई, वह धीरे-धीरे कथाकार के पास गया और पूछा, ‘‘पंडित जी, आपने जो कहा है कि हनुमान केला खाना पसंद करते हैं और केले के बगीचे में रहते हैं, तो क्या मैं वहां उनके दर्शन कर सकता हूं?’’ पंडित ने भोले बालक को बहलाने के लिए उत्तर दिया,
से वह उसे देखने के लिए बड़ा उत्सुक था। पर देखे तो कहां देखे। कुछ समझ में नहीं आ रहा था। एक दिन वह कथा सुनने गया तो कथाकार पंडित अपनी अलंकारिक भाषा में हास्य-रस मिलाकर हनुमान के चरित्र का वर्णन कह रहा था। नरेन्द्र के मन में जाने क्या आई, वह धीरे-धीरे कथाकार के पास गया और पूछा, ‘‘पंडित जी, आपने जो कहा है कि हनुमान केला खाना पसंद करते हैं और केले के बगीचे में रहते हैं, तो क्या मैं वहां उनके दर्शन कर सकता हूं?’’ पंडित ने भोले बालक को बहलाने के लिए उत्तर दिया,