‘‘नहीं, कर सके नहीं- कहिए कि उन्होंने की नहीं।’’ स्वामी जी ने उत्तर दिया, ‘‘और यही हिन्दू जाति का गौरव है कि उसने कभी दूसरी जाति के रक्त से पृथ्वी को रंजित नहीं किया। वे दूसरे के देश पर अधिकार क्यों करेंगे? तुच्छ धन की लालसा से? भगवान ने हमेशा से भारत को दाता के महिमामय आसन पर प्रतिष्ठित किया है। भारतवासी जगत् के धर्म-गुरू रहे हैं, वे दूसरों के धन को लूटने वाले डाकू न थे। इसीलिए मैं अपने पूर्वजों पर गर्व करता हूं।’’
‘‘नहीं, कर सके नहीं- कहिए कि उन्होंने की नहीं।’’ स्वामी जी ने उत्तर दिया, ‘‘और यही हिन्दू जाति का गौरव है कि उसने कभी दूसरी जाति के रक्त से पृथ्वी को रंजित नहीं किया। वे दूसरे के देश पर अधिकार क्यों करेंगे? तुच्छ धन की लालसा से? भगवान ने हमेशा से भारत को दाता के महिमामय आसन पर प्रतिष्ठित किया है। भारतवासी जगत् के धर्म-गुरू रहे हैं, वे दूसरों के धन को लूटने वाले डाकू न थे। इसीलिए मैं अपने पूर्वजों पर गर्व करता हूं।’’