और उन्होंने अपने कलकत्ता के भाषण में कहा था:
‘‘प्रत्येक जाति के लिए उद्देश्य साधन की अलग-अलग कार्य प्रणालियां हैं, कोई राजनीति, कोई समाज-सुधार और कोई दूसरे विषय को अपना प्रधान आधार बनाकर कार्य करती है। हमारे धर्म की पृष्ठभूमि लेकर कार्य करने के सिवा दूसरा कोई उपाय नहीं। अंगे्रज़ राजनीति के माध्यम से धर्म भी समझ सकते हैं। अमेरिकी शायद समाज-सुधार के माध्यम से भी धर्म समझ सकते हैं। परन्तु हिन्दू राजनीति, समाज-विज्ञान और दूसरा जो कुछ है,
और उन्होंने अपने कलकत्ता के भाषण में कहा था:
‘‘प्रत्येक जाति के लिए उद्देश्य साधन की अलग-अलग कार्य प्रणालियां हैं, कोई राजनीति, कोई समाज-सुधार और कोई दूसरे विषय को अपना प्रधान आधार बनाकर कार्य करती है। हमारे धर्म की पृष्ठभूमि लेकर कार्य करने के सिवा दूसरा कोई उपाय नहीं। अंगे्रज़ राजनीति के माध्यम से धर्म भी समझ सकते हैं। अमेरिकी शायद समाज-सुधार के माध्यम से भी धर्म समझ सकते हैं। परन्तु हिन्दू राजनीति, समाज-विज्ञान और दूसरा जो कुछ है,