‘‘हां बेटा, बगीचे में तुम उन्हें पा सकते हो।’’
नरेन्द्र ने इसके बाद भी हनुमान को बगीचे में ढूंढ़ा हो या न ढूंढ़ा हो, पर यह तय है कि वह हमेशा उनके प्रियपात्र बने रहे। जैसे-जैसे आयु बढ़ी, उनके प्रति श्रद्वा भी बढ़ती गई। मृत्यु से कुछ महीने पहले शिष्य शरच्चन्द्र चक्रवर्ती ने जब पूछा, ‘‘हमारे लिए इस समय किस आदर्श को ग्रहण करना उचित है?’’ तो उन्होंने उत्तर दिया, ‘‘महावीर के चरित्र को ही तुम्हें इस समय आदर्श मानना पड़ेगा। देखो,
‘‘हां बेटा, बगीचे में तुम उन्हें पा सकते हो।’’
नरेन्द्र ने इसके बाद भी हनुमान को बगीचे में ढूंढ़ा हो या न ढूंढ़ा हो, पर यह तय है कि वह हमेशा उनके प्रियपात्र बने रहे। जैसे-जैसे आयु बढ़ी, उनके प्रति श्रद्वा भी बढ़ती गई। मृत्यु से कुछ महीने पहले शिष्य शरच्चन्द्र चक्रवर्ती ने जब पूछा, ‘‘हमारे लिए इस समय किस आदर्श को ग्रहण करना उचित है?’’ तो उन्होंने उत्तर दिया, ‘‘महावीर के चरित्र को ही तुम्हें इस समय आदर्श मानना पड़ेगा। देखो,