योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

न, वे राम की आज्ञा से समुद्र लांघकर चले गए! जीवन-मृत्यु की परवाह कहां? महाजितेन्द्रिय, महाबुद्विमान, दास्य-भाव के उस महान आदर्श से तुम्हें अपना जीवन गठित करना होगा। वैसा करने पर दूसरे भावों का विकास स्वयं ही हो जाएगा...अवलम्बन करने योग्य और दूसरा पथ नहीं। एक ओर हनुमान जी जैसा सेवा भाव और दूसरी ओर उसी प्रकार त्रैलोक्य को भयभीत कर देने वाला सिंह जैसा विक्रम!....राम की सेवा के अतिरिक्त अन्य सभी विषयों के प्रति उपेक्षा,


59 of 1197

न, वे राम की आज्ञा से समुद्र लांघकर चले गए! जीवन-मृत्यु की परवाह कहां? महाजितेन्द्रिय, महाबुद्विमान, दास्य-भाव के उस महान आदर्श से तुम्हें अपना जीवन गठित करना होगा। वैसा करने पर दूसरे भावों का विकास स्वयं ही हो जाएगा...अवलम्बन करने योग्य और दूसरा पथ नहीं। एक ओर हनुमान जी जैसा सेवा भाव और दूसरी ओर उसी प्रकार त्रैलोक्य को भयभीत कर देने वाला सिंह जैसा विक्रम!....राम की सेवा के अतिरिक्त अन्य सभी विषयों के प्रति उपेक्षा,


59 of 1197