योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘‘सच्ची बात यह है कि मैं धर्म-महासभा का उद्देश्य लेकर अमेरिका नहीं गया था। वह सभा तो मेरे लिए गौण वस्तु थी, उससे हमारा रास्ता बहुत कुछ साफ हो गया और कार्य करने की बहुत कुछ सुविधा हो गई, परन्तु वास्तव में हमारा धन्यवाद संयुक्त राज्य अमेरिका के निवासी, सहृय आतिथेय, महान अमेरिकी जाति को मिलना चाहिए, जिसमें दूसरी जातियों की अपेक्षा भ्रातभाव का अधिक विकास हुआ है।’’ (पृष्ठ, 204)

5 मई, 1895 को उन्होंने आलासिंगा पेरूमल के नाम अपने पत्र में लिखा था:


582 of 1197

‘‘सच्ची बात यह है कि मैं धर्म-महासभा का उद्देश्य लेकर अमेरिका नहीं गया था। वह सभा तो मेरे लिए गौण वस्तु थी, उससे हमारा रास्ता बहुत कुछ साफ हो गया और कार्य करने की बहुत कुछ सुविधा हो गई, परन्तु वास्तव में हमारा धन्यवाद संयुक्त राज्य अमेरिका के निवासी, सहृय आतिथेय, महान अमेरिकी जाति को मिलना चाहिए, जिसमें दूसरी जातियों की अपेक्षा भ्रातभाव का अधिक विकास हुआ है।’’ (पृष्ठ, 204)

5 मई, 1895 को उन्होंने आलासिंगा पेरूमल के नाम अपने पत्र में लिखा था:


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