का स्वप्न साकार होगा। अतएव हमने उन्हें अपने मद्रास के भाषण में, जिसे हम पिछले परिच्छेद में उद्वत कर चुके हैं, कहते सुना:
‘‘क्या हमें केवल अपने ही देश को जगाना होगा? नहीं, यह तो एक तुच्छ बात है, मैं एक कल्पनाशील मनुष्य हूं, मेरी यह भावना है कि हिन्दू जाति सारे संसार पर विजय प्राप्त करेगी।’’
और भारत लौटने से पहले लंदन में यही विचार व्यक्त करने पर ‘इंडिया’ के संवाददाता ने सवाल किया था:
120 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
का स्वप्न साकार होगा। अतएव हमने उन्हें अपने मद्रास के भाषण में, जिसे हम पिछले परिच्छेद में उद्वत कर चुके हैं, कहते सुना:
‘‘क्या हमें केवल अपने ही देश को जगाना होगा? नहीं, यह तो एक तुच्छ बात है, मैं एक कल्पनाशील मनुष्य हूं, मेरी यह भावना है कि हिन्दू जाति सारे संसार पर विजय प्राप्त करेगी।’’
और भारत लौटने से पहले लंदन में यही विचार व्यक्त करने पर ‘इंडिया’ के संवाददाता ने सवाल किया था:
120 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द