‘‘और भारत अंत में अपने विजेताओं पर विजयी होगा?’’
‘‘हां, विचारों के क्षेत्र में इंग्लैंड के पास हथियार हैं, सांसारिक समृद्वि है, वैसे ही जैसे उससे पहले हमारे मुसलमान विजेताओं के पास थी। फिर भी महान अकबर व्यावहारिक रूप में हिन्दू हो गया था, शिक्षित मुसलमानों, सूफियों को हिन्दुओं से अलग कर पाना कठिन है।’’ (चतुर्थ खंड, पृष्ठ 337)
अतएव कल्पनाशील विवेकानन्द भारत के दरिद्रजन के लिए आर्थिक सहायता पाने का स्वप्न देखते हुए विदेश गए थे,
‘‘और भारत अंत में अपने विजेताओं पर विजयी होगा?’’
‘‘हां, विचारों के क्षेत्र में इंग्लैंड के पास हथियार हैं, सांसारिक समृद्वि है, वैसे ही जैसे उससे पहले हमारे मुसलमान विजेताओं के पास थी। फिर भी महान अकबर व्यावहारिक रूप में हिन्दू हो गया था, शिक्षित मुसलमानों, सूफियों को हिन्दुओं से अलग कर पाना कठिन है।’’ (चतुर्थ खंड, पृष्ठ 337)
अतएव कल्पनाशील विवेकानन्द भारत के दरिद्रजन के लिए आर्थिक सहायता पाने का स्वप्न देखते हुए विदेश गए थे,