योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जो अमेरिका पहुंचते ही टूट गया और आध्यात्मिक विचारों के आधार पर विश्व-विजय का स्वप्न देखते हुए स्वदेश लौटे। दरअसल यह उनका अपना स्वप्न नहीं, हमारे उभरते हुए पूंजीपतियांे और उनके बुद्विजीवियों का स्वप्न था, यही उनकी वैदेशिक नीति थी और इसी आधार पर गृह-विवाद और कुसंस्कारों को हटाकर राष्ट्रीय एकता संगठित करने की बात सोची गई। और हम विवेकानन्द को ‘हमारा प्रस्तुत कार्य’ नाम के भाषण में कहते हुए सुनते हैं:

‘‘इसलिए मद्रासी नवयुवकों,


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जो अमेरिका पहुंचते ही टूट गया और आध्यात्मिक विचारों के आधार पर विश्व-विजय का स्वप्न देखते हुए स्वदेश लौटे। दरअसल यह उनका अपना स्वप्न नहीं, हमारे उभरते हुए पूंजीपतियांे और उनके बुद्विजीवियों का स्वप्न था, यही उनकी वैदेशिक नीति थी और इसी आधार पर गृह-विवाद और कुसंस्कारों को हटाकर राष्ट्रीय एकता संगठित करने की बात सोची गई। और हम विवेकानन्द को ‘हमारा प्रस्तुत कार्य’ नाम के भाषण में कहते हुए सुनते हैं:

‘‘इसलिए मद्रासी नवयुवकों,


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