विशालता तथा सौंदर्य का मोहक, आकर्षक चित्र प्रस्तुत किया, जिसके एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य गुप्तवंश की तलवार द्वारा संम्पन्न हो रहा था, फिर इसी एकता को भावात्मक स्तर पर सुदृढ़ बनाने के लिए शंकराचार्य भी दक्षिण ही से उठे और उन्होंने बौद्व कुसंस्कारों से संघर्ष करते हुए, उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम की चार दिशाओं में चार धाम स्ािापित किए और अब तीसरी बार जबकि देश गुलामी की जं़जीरों में जकड़ा हुआ था, आध्यात्मिकता तथा दार्शनिकता
विशालता तथा सौंदर्य का मोहक, आकर्षक चित्र प्रस्तुत किया, जिसके एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य गुप्तवंश की तलवार द्वारा संम्पन्न हो रहा था, फिर इसी एकता को भावात्मक स्तर पर सुदृढ़ बनाने के लिए शंकराचार्य भी दक्षिण ही से उठे और उन्होंने बौद्व कुसंस्कारों से संघर्ष करते हुए, उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम की चार दिशाओं में चार धाम स्ािापित किए और अब तीसरी बार जबकि देश गुलामी की जं़जीरों में जकड़ा हुआ था, आध्यात्मिकता तथा दार्शनिकता