योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पर अपने देश के इस भाग के दर्शन का सौभाग्य मुझे नहीं मिला था। अपनी ही जन्मभूमि बंगाल के इस अंचल की विशाल नदियों, विस्तृत उपजाऊ मैदानों और रमणीक गा्रमों का दर्शन पाने पर मैं अपनी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। मैं नहीं जानता था कि इस देश के जल और स्थल सभी में इतना सौंदर्य तथा आकर्षण भरा पड़ा है। किन्तु नाना देशों के भ्रमण से मुझे यह लाभ हुआ है कि मैं विशेष रूप से अपने देश के सौंदर्य का मूल्यांकन कर सकता हूं।’’

‘‘इसी प्रकार मैं


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पर अपने देश के इस भाग के दर्शन का सौभाग्य मुझे नहीं मिला था। अपनी ही जन्मभूमि बंगाल के इस अंचल की विशाल नदियों, विस्तृत उपजाऊ मैदानों और रमणीक गा्रमों का दर्शन पाने पर मैं अपनी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। मैं नहीं जानता था कि इस देश के जल और स्थल सभी में इतना सौंदर्य तथा आकर्षण भरा पड़ा है। किन्तु नाना देशों के भ्रमण से मुझे यह लाभ हुआ है कि मैं विशेष रूप से अपने देश के सौंदर्य का मूल्यांकन कर सकता हूं।’’

‘‘इसी प्रकार मैं


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