योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पहले धर्म-जिज्ञासा से नाना सम्प्रदायों में-अनेक ऐसे सम्प्रदायों में जिन्होंने दूसरे राष्ट्रों के भावों का अपना लिया है-भ्रमण करता था, दूसरों के द्वार पर भिक्षा मांगता था। तब मैं जानता न था कि मेरे देश का धर्म, मेरी जाति का धर्म इतना सुन्दर और महान है। कई वर्ष हुए मुझे पता लगा कि हिन्दू धर्म संसार का सर्वाधिक पूर्ण संतोषजनक धर्म है। अतः मुझे यह देखकर हार्दिक क्लेश होता है कि यद्यपि हमारे देशवासी अप्रतिम धर्मनिष्ठ होने का दावा करते हैं,


593 of 1197

पहले धर्म-जिज्ञासा से नाना सम्प्रदायों में-अनेक ऐसे सम्प्रदायों में जिन्होंने दूसरे राष्ट्रों के भावों का अपना लिया है-भ्रमण करता था, दूसरों के द्वार पर भिक्षा मांगता था। तब मैं जानता न था कि मेरे देश का धर्म, मेरी जाति का धर्म इतना सुन्दर और महान है। कई वर्ष हुए मुझे पता लगा कि हिन्दू धर्म संसार का सर्वाधिक पूर्ण संतोषजनक धर्म है। अतः मुझे यह देखकर हार्दिक क्लेश होता है कि यद्यपि हमारे देशवासी अप्रतिम धर्मनिष्ठ होने का दावा करते हैं,


593 of 1197