पर हमारे इस महान देश में यूरोपीय ढंग के विचार फेलने के कारण उनमें धर्म के प्रति व्यापक उदासीनता आ गई है। हां, यह बात ज़रूर है और उससे मैं भली-भांति अवगत हूं कि उन्हें जिन भौतिक परिस्थितियों मंे जीवनयापन करना पड़ता है, प्रतिकूल हैं।’’
इन प्रतिकूल भौतिक परस्थितियों ने विभिन्न स्तरों के जिन विचारशील लोगों का निर्माण किया था, विवेकानन्द ने उनका वर्गीकरण इस प्रकार है:
‘‘वर्तमान काल में हम लोगों के बीच ऐसे कुछ सुधारक हैं,
पर हमारे इस महान देश में यूरोपीय ढंग के विचार फेलने के कारण उनमें धर्म के प्रति व्यापक उदासीनता आ गई है। हां, यह बात ज़रूर है और उससे मैं भली-भांति अवगत हूं कि उन्हें जिन भौतिक परिस्थितियों मंे जीवनयापन करना पड़ता है, प्रतिकूल हैं।’’
इन प्रतिकूल भौतिक परस्थितियों ने विभिन्न स्तरों के जिन विचारशील लोगों का निर्माण किया था, विवेकानन्द ने उनका वर्गीकरण इस प्रकार है:
‘‘वर्तमान काल में हम लोगों के बीच ऐसे कुछ सुधारक हैं,