खून से प्लावित कर दें। धर्म तथा सभी अन्य चीज़ों को उन्होंने पददलित कर रखा है, वे ही शासक हैं और सर्वश्रेष्ठ समझे जाते हैं। आज पाश्चात्य संसार तो ऐसे ही इने-गिने ‘शायलाकों’ के द्वारा शासित है, और यह तो तुम वहां की वैधानिक सरकार, स्वतंत्रता, आज़ादी, संसद आदि की बातचीत सुना करते हो, वह सब मज़ाक है। (वही, पृष्ठ 55)
124 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
विवेकानन्द ने पश्चिम की बुराइयां ही नहीं अच्छाइयां भी देखी, और जैसा कि हम लिख चुके हैं,
खून से प्लावित कर दें। धर्म तथा सभी अन्य चीज़ों को उन्होंने पददलित कर रखा है, वे ही शासक हैं और सर्वश्रेष्ठ समझे जाते हैं। आज पाश्चात्य संसार तो ऐसे ही इने-गिने ‘शायलाकों’ के द्वारा शासित है, और यह तो तुम वहां की वैधानिक सरकार, स्वतंत्रता, आज़ादी, संसद आदि की बातचीत सुना करते हो, वह सब मज़ाक है। (वही, पृष्ठ 55)
124 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
विवेकानन्द ने पश्चिम की बुराइयां ही नहीं अच्छाइयां भी देखी, और जैसा कि हम लिख चुके हैं,