अत्याचारों से कातर क्रंदन कर रहा है। होना तो यह चाहिए कि ये दोनों आपस में एक दूसरे को संयमित रखें। यह कभी मत सोचो कि इनमें से कवेल एक ही से संसार का लाभ होगा।’’ (वही)
समन्वय चूंकि सम्यक् ज्ञान के आधार ही पर सम्भव है, इसलिए विवेकानन्द ने एक तरफ, शासक वर्ग ने हममें हीनता भाव लाने और अपने ही अतीत से विमुख हो जाने के लिए मैकाले की शिक्षा द्वारा जो भ्रांतियां फेलाई, उन पर चोट की और दूसरी तरफ, पुरोहित-प्रपंच के स्वार्थ द्वारा
अत्याचारों से कातर क्रंदन कर रहा है। होना तो यह चाहिए कि ये दोनों आपस में एक दूसरे को संयमित रखें। यह कभी मत सोचो कि इनमें से कवेल एक ही से संसार का लाभ होगा।’’ (वही)
समन्वय चूंकि सम्यक् ज्ञान के आधार ही पर सम्भव है, इसलिए विवेकानन्द ने एक तरफ, शासक वर्ग ने हममें हीनता भाव लाने और अपने ही अतीत से विमुख हो जाने के लिए मैकाले की शिक्षा द्वारा जो भ्रांतियां फेलाई, उन पर चोट की और दूसरी तरफ, पुरोहित-प्रपंच के स्वार्थ द्वारा