योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

देखोगे, ढोल-करताल ही बज रहे हैं। दुन्दुभी-नगाड़े क्या देश में तैयार नहीं होते? तरही-भेरी क्या भारत में नहीं मिलती? वही सब गुरू-गम्भीर ध्वनि लड़कों को सुना। बचपन से जनाने बाजे सुन-सुनकर, कीर्तन सुन-सुनकर, देश स्त्रियों का देश बन गया है। इससे अधिक और क्या अधःपतन होगा, नगाड़े में ब्रह्मरूद्र ताल का दुन्दुभिनाद उठाना होगा। ‘महावीर-, ‘महावीर’, की ध्वनि तथा ‘हर हर बम बम’ शब्द से दिग्दिगन्त कम्पित कर देना होगा....(वि. सा., षष्ठ खंड, पृ. 186)


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देखोगे, ढोल-करताल ही बज रहे हैं। दुन्दुभी-नगाड़े क्या देश में तैयार नहीं होते? तरही-भेरी क्या भारत में नहीं मिलती? वही सब गुरू-गम्भीर ध्वनि लड़कों को सुना। बचपन से जनाने बाजे सुन-सुनकर, कीर्तन सुन-सुनकर, देश स्त्रियों का देश बन गया है। इससे अधिक और क्या अधःपतन होगा, नगाड़े में ब्रह्मरूद्र ताल का दुन्दुभिनाद उठाना होगा। ‘महावीर-, ‘महावीर’, की ध्वनि तथा ‘हर हर बम बम’ शब्द से दिग्दिगन्त कम्पित कर देना होगा....(वि. सा., षष्ठ खंड, पृ. 186)


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