हनुमान को शिव का अवतार भी कहा जाता है।
पंच बरस पूरे होने पर नरेन्द्र की शिक्षा कुछ दिन घर पर हुई। इसके बाद उसे मेट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूट में भेज दिया गया। वहां नरेन्द्र को बहुत से हमउम्र सहपाठी मिले। नये साथी पाकर उसके आनन्द की सीमा न रही और उसने जल्दी ही अपना एक छोटा-सा दल संगठित कर लिया। उसके ये साथी सुबह-शाम घर पर खेलने आते। ‘दत्त भवन’ का विशाल आंगन उनके कोलाहल से गूंज उठता।
खेल में अगर कोई लड़का किसी प्रकार की
हनुमान को शिव का अवतार भी कहा जाता है।
पंच बरस पूरे होने पर नरेन्द्र की शिक्षा कुछ दिन घर पर हुई। इसके बाद उसे मेट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूट में भेज दिया गया। वहां नरेन्द्र को बहुत से हमउम्र सहपाठी मिले। नये साथी पाकर उसके आनन्द की सीमा न रही और उसने जल्दी ही अपना एक छोटा-सा दल संगठित कर लिया। उसके ये साथी सुबह-शाम घर पर खेलने आते। ‘दत्त भवन’ का विशाल आंगन उनके कोलाहल से गूंज उठता।
खेल में अगर कोई लड़का किसी प्रकार की