रूपी मदिरापन से मत्त होकर अपने को सर्वज्ञ समझता है। वह प्राचीन ऋषियों की हंसी उड़ाया करता है। उसके लिए हिन्दुओं के सब विचार बिल्कुल वाहियात चीज़ हैं, हिन्दू दर्शनशास्त्र बच्चों का कलरव मात्र है और हिन्दू मूर्खों का मात्र अंधविश्वास । दूसरी तरफ वह आदमी है, जो शिक्षित तो है पर जिस पर किसी एक चीज़ की सनक सवार है और वह उल्टी राह लेकर हर एक छोटी-सी बात का अलौकिक अर्थ निकालने की कोशिश करता है। अपनी विशेष जातियां देव-देवियों या गांव से संबंध रखने वाले जितने कुसंस्कार हैं,
रूपी मदिरापन से मत्त होकर अपने को सर्वज्ञ समझता है। वह प्राचीन ऋषियों की हंसी उड़ाया करता है। उसके लिए हिन्दुओं के सब विचार बिल्कुल वाहियात चीज़ हैं, हिन्दू दर्शनशास्त्र बच्चों का कलरव मात्र है और हिन्दू मूर्खों का मात्र अंधविश्वास । दूसरी तरफ वह आदमी है, जो शिक्षित तो है पर जिस पर किसी एक चीज़ की सनक सवार है और वह उल्टी राह लेकर हर एक छोटी-सी बात का अलौकिक अर्थ निकालने की कोशिश करता है। अपनी विशेष जातियां देव-देवियों या गांव से संबंध रखने वाले जितने कुसंस्कार हैं,