योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उनको उचित सिद्व करने के लिए दार्शनिक, आध्यात्मिक तथा बच्चों को सुहाने वाले न जाने क्या अर्थ उसके पास सर्वदा ही मौजुद हैं। उसके लिए प्रत्येक ग्राम्य कुसंस्कार वेदों की आज्ञा है, और उसकी समझ में उसे कार्यरूप में परिणत करने ही पर जातीय जीवन निर्भर है। तुम्हें इन सबसे बचना चाहिए।

‘‘तुममें से प्रत्येक मनुष्य कुसंस्कारपूर्ण मूर्ख होने के बदले यदि घोर नास्तिक भी हो जाए तो मुझे पसंद है, क्योंकि नास्तिक तो जीवन्त है, तुम उसे


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उनको उचित सिद्व करने के लिए दार्शनिक, आध्यात्मिक तथा बच्चों को सुहाने वाले न जाने क्या अर्थ उसके पास सर्वदा ही मौजुद हैं। उसके लिए प्रत्येक ग्राम्य कुसंस्कार वेदों की आज्ञा है, और उसकी समझ में उसे कार्यरूप में परिणत करने ही पर जातीय जीवन निर्भर है। तुम्हें इन सबसे बचना चाहिए।

‘‘तुममें से प्रत्येक मनुष्य कुसंस्कारपूर्ण मूर्ख होने के बदले यदि घोर नास्तिक भी हो जाए तो मुझे पसंद है, क्योंकि नास्तिक तो जीवन्त है, तुम उसे


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