किसी तरह परिवर्तित कर सकते हो। परन्तु यदि कुसंस्कार घुस जाए, तो मस्तिष्क बिगड़ जाएगा, कमजोर हो जाएगा और मनुष्य विनाश की ओर अग्रसर होने लगेगा। तो इन दो
125 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
संकटों से बचो। हमें निर्भीक साहसी मनुष्य ही का प्रयोजन है, हमंे खून में तेज़ी और स्नायु मंे बल की आवश्यकता है, लोहे के पुटठ्े और फौलाद के स्नाय चाहिए, न कि दुर्बलता लाने वाले वाहियात विचार। इन सबको त्याग दो, सब प्रकार के रहस्यों से बचो।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 172)
किसी तरह परिवर्तित कर सकते हो। परन्तु यदि कुसंस्कार घुस जाए, तो मस्तिष्क बिगड़ जाएगा, कमजोर हो जाएगा और मनुष्य विनाश की ओर अग्रसर होने लगेगा। तो इन दो
125 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
संकटों से बचो। हमें निर्भीक साहसी मनुष्य ही का प्रयोजन है, हमंे खून में तेज़ी और स्नायु मंे बल की आवश्यकता है, लोहे के पुटठ्े और फौलाद के स्नाय चाहिए, न कि दुर्बलता लाने वाले वाहियात विचार। इन सबको त्याग दो, सब प्रकार के रहस्यों से बचो।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 172)