योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



विवेकानन्द ने इस बात को भली-भांति समझ लिया था कि संस्कृति ही युगों के आघात को सहन कर सकती है, मात्र ज्ञान राशि नहीं। और उनमें यह समझ न सिर्फ अपने देश बल्कि दुनिया-भर के इतिहास, दर्शन तथा साहित्य के गहरे अध्ययन से पैदा हुई थी। वे अपने समय का चलता-फिरता विश्वकोष-इंसाइक्लोपीडिया थे। पर उन्हें अपने इस ज्ञान का दम्भ नहीं था, बल्कि आत्मज्ञान-युक्त स्निग्ध विनम्रता, सहृदयता और सहनशीलता थी। चाहे उन्हांेने माक्र्स का कहीं उल्लेख नहीं किया,


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विवेकानन्द ने इस बात को भली-भांति समझ लिया था कि संस्कृति ही युगों के आघात को सहन कर सकती है, मात्र ज्ञान राशि नहीं। और उनमें यह समझ न सिर्फ अपने देश बल्कि दुनिया-भर के इतिहास, दर्शन तथा साहित्य के गहरे अध्ययन से पैदा हुई थी। वे अपने समय का चलता-फिरता विश्वकोष-इंसाइक्लोपीडिया थे। पर उन्हें अपने इस ज्ञान का दम्भ नहीं था, बल्कि आत्मज्ञान-युक्त स्निग्ध विनम्रता, सहृदयता और सहनशीलता थी। चाहे उन्हांेने माक्र्स का कहीं उल्लेख नहीं किया,


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