पर माक्र्स द्वारा कथित इस तथ्य को जान लिया था कि नया समाज कहीं ऊपर से नहीं टपक पड़ता, उसका जन्म पुराने समाज के गर्भ से होता है। आमूल-चूल परिवर्तन और जड़ में आग देने का अर्थ यह कदाचित् नहीं कि हमारे पास जो कुछ है उसे नष्ट कर दो, शून्य से नया जीवन शुरू करो, नष्ट करना होता है भ्रम-भ्रान्तियांे और कुसंस्कारों को। अखंड राष्ट्रीय एकता के लिए मज़बूत रीढ़, लोहे के पुट्ठे और फौलाद की स्नायु वाला नया मनुष्य दरकार था, इसके निर्माण के
पर माक्र्स द्वारा कथित इस तथ्य को जान लिया था कि नया समाज कहीं ऊपर से नहीं टपक पड़ता, उसका जन्म पुराने समाज के गर्भ से होता है। आमूल-चूल परिवर्तन और जड़ में आग देने का अर्थ यह कदाचित् नहीं कि हमारे पास जो कुछ है उसे नष्ट कर दो, शून्य से नया जीवन शुरू करो, नष्ट करना होता है भ्रम-भ्रान्तियांे और कुसंस्कारों को। अखंड राष्ट्रीय एकता के लिए मज़बूत रीढ़, लोहे के पुट्ठे और फौलाद की स्नायु वाला नया मनुष्य दरकार था, इसके निर्माण के