लिए जहां भ्रम-भ्रान्तियों और कुसंस्कारों को नष्ट करना ज़रूरी था वहां यह भी ज़रूरी था कि हमारी हज़ारों बरस की संस्कृति में जो कुछ स्वस्थ और जीवन्त है, उसे हम समझें और आत्मसात् करके भौतिक शक्ति में परिणत करें। इसके विपरीत तथाकथित सुधारक धर्म और धर्म से संबंधित रीति-रिवाज पर प्रहार करते थे और अपने छिछले पाश्चात्य ज्ञान के मद में यह समझ बैठे थे कि इसी से विभिन्न जातियों तथा सम्प्रदायों के बीच के अंतर्विरोधों का अंत होगा और इसी से देश आगे बढ़ेगा,
लिए जहां भ्रम-भ्रान्तियों और कुसंस्कारों को नष्ट करना ज़रूरी था वहां यह भी ज़रूरी था कि हमारी हज़ारों बरस की संस्कृति में जो कुछ स्वस्थ और जीवन्त है, उसे हम समझें और आत्मसात् करके भौतिक शक्ति में परिणत करें। इसके विपरीत तथाकथित सुधारक धर्म और धर्म से संबंधित रीति-रिवाज पर प्रहार करते थे और अपने छिछले पाश्चात्य ज्ञान के मद में यह समझ बैठे थे कि इसी से विभिन्न जातियों तथा सम्प्रदायों के बीच के अंतर्विरोधों का अंत होगा और इसी से देश आगे बढ़ेगा,