उन्हें विवेकानन्द गाल बजाने वाले चंचल बच्चों से अधिक महत्व नहीं देते थे। अतएव वेदान्त के मुख्य तत्वों की व्याख्या करने के बाद उन्होंने जाफना के अपने भाषण में कहा:
‘‘यद्यपि हमारा जाति भेद और अन्यान्य प्रथाएं धर्म के साथ आपस में मिली हुई दिखती हैं, ऐसी बात नहीं। यह प्रथाएं राष्ट्र रूप में हमारी रक्षा के लिए आवश्यक थी और जब आत्मरक्षा के लिए इनकी ज़रूरत न रह जाएगी, तब सम्भवतः वे नष्ट हो जाएंगी। किन्तु मेरी उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ती जाती है,
उन्हें विवेकानन्द गाल बजाने वाले चंचल बच्चों से अधिक महत्व नहीं देते थे। अतएव वेदान्त के मुख्य तत्वों की व्याख्या करने के बाद उन्होंने जाफना के अपने भाषण में कहा:
‘‘यद्यपि हमारा जाति भेद और अन्यान्य प्रथाएं धर्म के साथ आपस में मिली हुई दिखती हैं, ऐसी बात नहीं। यह प्रथाएं राष्ट्र रूप में हमारी रक्षा के लिए आवश्यक थी और जब आत्मरक्षा के लिए इनकी ज़रूरत न रह जाएगी, तब सम्भवतः वे नष्ट हो जाएंगी। किन्तु मेरी उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ती जाती है,