योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

ये पुरानी प्रथाएं मुझे भली मालूम होती जाती है। एक समय ऐसा था कि जब मैं इनमें से अधिकांश को अनावश्यक तथा व्यर्थ समझता था। परन्तु आयु वृद्वि के साथ इनमें से किसी के विरूद्व कुछ भी कहते मुझे संकोच होता है, क्योंकि उनका आविष्कार सैकड़ों सदियों के अनुभव का फल है। कल का छोकरा, कल ही जिसकी मृत्यु हो सकती है, यदि मेरे पास आए और मेरे चिरकाल के संकल्पों को छोड़ देने को कहे और यदि मैं उस लड़के के मतानुसार अपनी व्यवस्था पलट दूं तो मैं ही मूर्ख बनूंगा,


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ये पुरानी प्रथाएं मुझे भली मालूम होती जाती है। एक समय ऐसा था कि जब मैं इनमें से अधिकांश को अनावश्यक तथा व्यर्थ समझता था। परन्तु आयु वृद्वि के साथ इनमें से किसी के विरूद्व कुछ भी कहते मुझे संकोच होता है, क्योंकि उनका आविष्कार सैकड़ों सदियों के अनुभव का फल है। कल का छोकरा, कल ही जिसकी मृत्यु हो सकती है, यदि मेरे पास आए और मेरे चिरकाल के संकल्पों को छोड़ देने को कहे और यदि मैं उस लड़के के मतानुसार अपनी व्यवस्था पलट दूं तो मैं ही मूर्ख बनूंगा,


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