योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

धांधली करता तो नरेन्द्र बहुत बिगड़ता और आगे बढ़कर फेसला करता। अगर देखता कि उसकी बात नहीं मानी जा रही और लड़के आपस में मार-पीट पर उतारू हैं तो वह निर्भीक भाव से बीच में खड़ा होकर उन्हें रोक देता। शारीरिक बल में नरेन्द्र अपने किसी भी हमजोली से हेठा न था, बल्कि उसका असीम साहस देख बड़े भी दंग रह जाते थे। घूंसा-घूंसी में निपुण होने के कारण दुष्ट लड़के उससे दबते थे।

जब उसकी अवस्था केवल छह बरस थी, वह अपने हमजोलियों के साथ ‘चड़क’


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धांधली करता तो नरेन्द्र बहुत बिगड़ता और आगे बढ़कर फेसला करता। अगर देखता कि उसकी बात नहीं मानी जा रही और लड़के आपस में मार-पीट पर उतारू हैं तो वह निर्भीक भाव से बीच में खड़ा होकर उन्हें रोक देता। शारीरिक बल में नरेन्द्र अपने किसी भी हमजोली से हेठा न था, बल्कि उसका असीम साहस देख बड़े भी दंग रह जाते थे। घूंसा-घूंसी में निपुण होने के कारण दुष्ट लड़के उससे दबते थे।

जब उसकी अवस्था केवल छह बरस थी, वह अपने हमजोलियों के साथ ‘चड़क’


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