और फिर अपनी कार्यप्रणाली प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा:
अतः भारत में किसी प्रकार का सुधार या उन्नति की चेष्टा करने से पहले धर्म-प्रचार आवश्यक है। भारत को समाजवादी अथवा राजनीतिक विचारों से प्लावित करने के पहले आवश्यक है कि उसमें आध्यात्मिक विचारों की बाढ़ ला दी जाए।’’ (पृष्ठ 116)
कोलम्बो से अल्मोड़ा तक विवेकानन्द ने जो भाषण दिए, उन सबमें सर्वोपरि यही है। विवेकानन्द के छोटे भाई भूपेन्द्र नाथ दत्त ने लिखा है कि बीसवीं
और फिर अपनी कार्यप्रणाली प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा:
अतः भारत में किसी प्रकार का सुधार या उन्नति की चेष्टा करने से पहले धर्म-प्रचार आवश्यक है। भारत को समाजवादी अथवा राजनीतिक विचारों से प्लावित करने के पहले आवश्यक है कि उसमें आध्यात्मिक विचारों की बाढ़ ला दी जाए।’’ (पृष्ठ 116)
कोलम्बो से अल्मोड़ा तक विवेकानन्द ने जो भाषण दिए, उन सबमें सर्वोपरि यही है। विवेकानन्द के छोटे भाई भूपेन्द्र नाथ दत्त ने लिखा है कि बीसवीं