सदी के पहले दशक में जो क्रान्तिकारी गुप्त संगठन बने, वे इसी प्रचार के फल थे। तमाम क्रान्तिकारी इन्हीं भाषणों से प्रेरणा लेते थे और पुलिस ने 1927 तक जितने भी क्रान्तिकारियों के घरों की तलाशियां लीं, उनमें विवेकानन्द साहित्य अवश्य मिलता था।1
विस्तार में जाने की गुंजाइश नहीं। इनमें ‘मेरी क्रान्तिकारी योजना’, ‘हमारा प्रस्तुत कार्य’ और ‘भारत का भविष्य’ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। विदेशी शासकों ने हमारे इतिहास को विस्तृत
सदी के पहले दशक में जो क्रान्तिकारी गुप्त संगठन बने, वे इसी प्रचार के फल थे। तमाम क्रान्तिकारी इन्हीं भाषणों से प्रेरणा लेते थे और पुलिस ने 1927 तक जितने भी क्रान्तिकारियों के घरों की तलाशियां लीं, उनमें विवेकानन्द साहित्य अवश्य मिलता था।1
विस्तार में जाने की गुंजाइश नहीं। इनमें ‘मेरी क्रान्तिकारी योजना’, ‘हमारा प्रस्तुत कार्य’ और ‘भारत का भविष्य’ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। विदेशी शासकों ने हमारे इतिहास को विस्तृत