करके बहुत-सी भ्रान्तियां फेलाई हैं और जनता के बीच व्यर्थ के अंतर्विरोध खड़े किए हैं, उन्होंने अपने इन भाषणों में उनका निराकरण किया है। उदाहरण के लिए यह धारणा कि गोरे रंग के आर्य लोग बाहर से आए
127 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
और उन्होंने भारत के काली आंखों वाले आदिवासियों को पराजित करके अपना दास बनाया और वर्तमान जाति-प्रथा की नींव रखी। विवेकानन्द ने इस सिद्वान्त को मनगढ़ंत बताते हुए लिखा है:
‘इस समस्या की एकमात्र व्याख्या
करके बहुत-सी भ्रान्तियां फेलाई हैं और जनता के बीच व्यर्थ के अंतर्विरोध खड़े किए हैं, उन्होंने अपने इन भाषणों में उनका निराकरण किया है। उदाहरण के लिए यह धारणा कि गोरे रंग के आर्य लोग बाहर से आए
127 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
और उन्होंने भारत के काली आंखों वाले आदिवासियों को पराजित करके अपना दास बनाया और वर्तमान जाति-प्रथा की नींव रखी। विवेकानन्द ने इस सिद्वान्त को मनगढ़ंत बताते हुए लिखा है:
‘इस समस्या की एकमात्र व्याख्या