योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

महाभारत में मिलती है। उसमें लिखा है कि सतयुग के आरम्भ में एक ही जाति ब्राह्मण थी और फिर पेशे के भेद से वह भिन्न जातियों में बंटती गई। बस, यही एक मात्र व्याख्या सच और युक्तिपूर्ण है। भविष्य मंे जो सतयुग आ रहा है उसमें ब्राह्मंण्ेतर सभी जातियां फिर ब्राह्मण रूप में परिणत होंगी।’’ (पृष्ठ 186)

इसी मिथ्या धारणा के आधार पर उत्तर और दक्षिण को आपस में लड़ाने और अलग-अलग करने का प्रयास अब तक जारी है। विवेकानन्द ने अपने मद्रासी श्रोताओं से कहा:


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महाभारत में मिलती है। उसमें लिखा है कि सतयुग के आरम्भ में एक ही जाति ब्राह्मण थी और फिर पेशे के भेद से वह भिन्न जातियों में बंटती गई। बस, यही एक मात्र व्याख्या सच और युक्तिपूर्ण है। भविष्य मंे जो सतयुग आ रहा है उसमें ब्राह्मंण्ेतर सभी जातियां फिर ब्राह्मण रूप में परिणत होंगी।’’ (पृष्ठ 186)

इसी मिथ्या धारणा के आधार पर उत्तर और दक्षिण को आपस में लड़ाने और अलग-अलग करने का प्रयास अब तक जारी है। विवेकानन्द ने अपने मद्रासी श्रोताओं से कहा:


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