योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘एक मत है कि दक्षिण भारत में द्रविण नाम की एक जाति के मनुष्य थे, जो उत्तर भारत की आर्य नामक जाति से बिल्कुल भिन्न थे और दक्षिण भारत के ब्राह्मण ही उत्तर भारत से आए हुए हैं, अन्य जातियां दक्षिणी ब्रह्मणों से बिल्कुल ही पृथक जाति की है। भाषा-वैज्ञानिक महाशय, मुझे क्षमा कीजिएगा, यह मत बिल्कुल निराधार है। भाषा का एकमात्र प्रमाण यह है कि उत्तर और दक्षिण की भाषा में भेद है। दूसरा भेद मेरी नज़र में नहीं आता। हम यहां उत्तर


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‘‘एक मत है कि दक्षिण भारत में द्रविण नाम की एक जाति के मनुष्य थे, जो उत्तर भारत की आर्य नामक जाति से बिल्कुल भिन्न थे और दक्षिण भारत के ब्राह्मण ही उत्तर भारत से आए हुए हैं, अन्य जातियां दक्षिणी ब्रह्मणों से बिल्कुल ही पृथक जाति की है। भाषा-वैज्ञानिक महाशय, मुझे क्षमा कीजिएगा, यह मत बिल्कुल निराधार है। भाषा का एकमात्र प्रमाण यह है कि उत्तर और दक्षिण की भाषा में भेद है। दूसरा भेद मेरी नज़र में नहीं आता। हम यहां उत्तर


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