का मेला देखने गया। मेला देखा और मिट्टी की बनी हुई शिव की मूर्तियां खरीदी। शाम को जब वे घर लौट रहे थे तो एक छोटा-सा लड़का दल से अलग हो गया और फुटपाथ से रास्ते में चला गया। ठीक उसी समय समाने से एक घोड़ागाड़ी आई, जिसे देख बालक घबरा गया। राह चलते राही रूक गए और ‘बचाओ ! बचाओ! चिल्लाने लगे। शोरगुल सुनकर नरेन्द्र ने पीछे की ओर देखा और सारी स्थिति भांप ली। एक क्षण की भी देर नहीं लगाई। महादेव की मूर्तियां फेंककर वह तेजी़ से लपका।
का मेला देखने गया। मेला देखा और मिट्टी की बनी हुई शिव की मूर्तियां खरीदी। शाम को जब वे घर लौट रहे थे तो एक छोटा-सा लड़का दल से अलग हो गया और फुटपाथ से रास्ते में चला गया। ठीक उसी समय समाने से एक घोड़ागाड़ी आई, जिसे देख बालक घबरा गया। राह चलते राही रूक गए और ‘बचाओ ! बचाओ! चिल्लाने लगे। शोरगुल सुनकर नरेन्द्र ने पीछे की ओर देखा और सारी स्थिति भांप ली। एक क्षण की भी देर नहीं लगाई। महादेव की मूर्तियां फेंककर वह तेजी़ से लपका।