उसका दावा है कि ‘‘मनुष्य (वस्तुतः) दिव्य है तथा जो कुछ भी हम लोग अपने चारों ओर देखते हैं, वह उसी दिव्यता के बोध से अद्भुत हुआ है। अतएव वेदान्त तथा विश्व के अन्य किसी भी मत के बीच कोई झगड़ा या विरोध नहीं है।’’
म्तलब यह कि विवेकानन्द के अनुसार इस सिद्वान्त के प्रचारित-प्रसारित करने ही से भारत में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होगी और फिर इसी आधार पर विश्व-बंधुत्व का स्वप्न साकार होगा। अपने अधुरे लेख ‘धर्म के मूल तत्व’ में उन्होंने लिखा है:
उसका दावा है कि ‘‘मनुष्य (वस्तुतः) दिव्य है तथा जो कुछ भी हम लोग अपने चारों ओर देखते हैं, वह उसी दिव्यता के बोध से अद्भुत हुआ है। अतएव वेदान्त तथा विश्व के अन्य किसी भी मत के बीच कोई झगड़ा या विरोध नहीं है।’’
म्तलब यह कि विवेकानन्द के अनुसार इस सिद्वान्त के प्रचारित-प्रसारित करने ही से भारत में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होगी और फिर इसी आधार पर विश्व-बंधुत्व का स्वप्न साकार होगा। अपने अधुरे लेख ‘धर्म के मूल तत्व’ में उन्होंने लिखा है: