अब हम अगले परिच्छेद में इस सिद्वान्त का विवेचन करेंगे ताकि विवेकानन्द के चिंतन में निहित अंतर्विरोध और उनका वर्ग-स्वभाव समझने में सुविधा हो सके।
आध्यात्मिक अद्वैतवाद बनाम भौतिक अद्वैतवाद
‘‘मनुष्य प्रकृति पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्पन्न हुआ है, उसका अनुसरण करने के लिए नहीं।’’
-विवेकानन्द
धर्म-महासभा में हिन्दू धर्म पर बोलते हुए विवेकानन्द कहते हैं:
‘‘विज्ञान एकत्व की खोज के सिवा और कुछ नहीं है। ज्योंहि कोई विज्ञान पूर्ण एकता तक पहुंच जाएगा,
अब हम अगले परिच्छेद में इस सिद्वान्त का विवेचन करेंगे ताकि विवेकानन्द के चिंतन में निहित अंतर्विरोध और उनका वर्ग-स्वभाव समझने में सुविधा हो सके।
आध्यात्मिक अद्वैतवाद बनाम भौतिक अद्वैतवाद
‘‘मनुष्य प्रकृति पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्पन्न हुआ है, उसका अनुसरण करने के लिए नहीं।’’
-विवेकानन्द
धर्म-महासभा में हिन्दू धर्म पर बोलते हुए विवेकानन्द कहते हैं:
‘‘विज्ञान एकत्व की खोज के सिवा और कुछ नहीं है। ज्योंहि कोई विज्ञान पूर्ण एकता तक पहुंच जाएगा,