त्यों की उसकी प्रगति रूक जाएगी, क्योंकि तब वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। उदाहरणार्थ, रसायन शास्त्र यदि एक बार उस मूल तत्व का पता लगा ले, जिससे और सब द्रव्य बन सकते हैं, तो फिर वह और आगे नहीं बढ़ सकेगा। भौतिकी जब उस एक मूल शक्ति का पता लगा लेगी, अन्य शक्तियां जिसकी अभिव्यक्ति हैं, तब वह वहीं रूक जाएगी। वैसे ही धर्म शास्त्र भी उस समय पूर्णता को प्राप्त कर लेगा, जब वह उसको खोज लेगा जो इस मृत्यु के लोक में एकमात्र परमात्मा है,
त्यों की उसकी प्रगति रूक जाएगी, क्योंकि तब वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। उदाहरणार्थ, रसायन शास्त्र यदि एक बार उस मूल तत्व का पता लगा ले, जिससे और सब द्रव्य बन सकते हैं, तो फिर वह और आगे नहीं बढ़ सकेगा। भौतिकी जब उस एक मूल शक्ति का पता लगा लेगी, अन्य शक्तियां जिसकी अभिव्यक्ति हैं, तब वह वहीं रूक जाएगी। वैसे ही धर्म शास्त्र भी उस समय पूर्णता को प्राप्त कर लेगा, जब वह उसको खोज लेगा जो इस मृत्यु के लोक में एकमात्र परमात्मा है,