और प्रकृति के नियमों की खोज लगाकर अपनी इस विजय को सम्भव बनाया।
131 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
प्रकृति को बदलने में वह स्वयं भी बदला। अपने इस संघर्ष ही में वह पशु से मनुष्य, हैवान से इंसान बना। मतलब यह कि उसके निर्माण में किसी दैवी शक्ति का हाथ नहीं बल्कि अपने इस संघर्ष के दौरान देव, दानव तथा ईश्वर आदि दैवी शक्तियों का निर्माण स्वयं उसने किया। सभी वियार भौतिक परिस्थितियों से उत्पन्न हुए, मनुष्य ने उन्हें व्यवहार की कसौटी पर परखा,
और प्रकृति के नियमों की खोज लगाकर अपनी इस विजय को सम्भव बनाया।
131 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
प्रकृति को बदलने में वह स्वयं भी बदला। अपने इस संघर्ष ही में वह पशु से मनुष्य, हैवान से इंसान बना। मतलब यह कि उसके निर्माण में किसी दैवी शक्ति का हाथ नहीं बल्कि अपने इस संघर्ष के दौरान देव, दानव तथा ईश्वर आदि दैवी शक्तियों का निर्माण स्वयं उसने किया। सभी वियार भौतिक परिस्थितियों से उत्पन्न हुए, मनुष्य ने उन्हें व्यवहार की कसौटी पर परखा,