योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

प्रकृति को कर्म और कल्पना दोनों से बदलने का प्रयास कर रहा था। अतएव अपने इसी प्रयास में भयंकर शक्तियों में देवत्व आरोपित करके उनकी उपासना-अर्चना की ताकि वे उसके लिए अभिशाप के बजाए वरदान बन जाएं और फिर कल्पना द्वारा ऐसे देवताओं की सृष्टि की जो इन शक्तियों के विरूद्व संघर्ष में उसकी सहायता करें। उदाहरण के लिए हम वैदिक काल के

132 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

मनुष्य को उपासना द्वारा वरूण, पवन और अग्नि को रिझाने देखते हैं


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प्रकृति को कर्म और कल्पना दोनों से बदलने का प्रयास कर रहा था। अतएव अपने इसी प्रयास में भयंकर शक्तियों में देवत्व आरोपित करके उनकी उपासना-अर्चना की ताकि वे उसके लिए अभिशाप के बजाए वरदान बन जाएं और फिर कल्पना द्वारा ऐसे देवताओं की सृष्टि की जो इन शक्तियों के विरूद्व संघर्ष में उसकी सहायता करें। उदाहरण के लिए हम वैदिक काल के

132 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

मनुष्य को उपासना द्वारा वरूण, पवन और अग्नि को रिझाने देखते हैं


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