और शास्त्र में निपुण हो ताकि वह युद्व में विजय प्राप्त करे और सभा में समादृत हो। उसके पा भार ढोने वाले स्वस्थ बैल, दूध देने वाली गौंए और वायु के वेग से तेज़ चलने वाले सुन्दर घोड़े हों।
जिस भाषा और काव्यों में वेदों की रचना हुई, उसे विकसित होने में जाने कितनी सदियां लगी और वेदों की रचना का समय भी हज़ारों साल लम्बा है। इस बीच में मनुष्य ने प्रकृति पर विजय प्राप्त की और विभिन्न दिशाओं में उनकी विचार-शक्ति का जो विकास हुआ, उस बारे में विवेकानन्द लिखते हैं:
और शास्त्र में निपुण हो ताकि वह युद्व में विजय प्राप्त करे और सभा में समादृत हो। उसके पा भार ढोने वाले स्वस्थ बैल, दूध देने वाली गौंए और वायु के वेग से तेज़ चलने वाले सुन्दर घोड़े हों।
जिस भाषा और काव्यों में वेदों की रचना हुई, उसे विकसित होने में जाने कितनी सदियां लगी और वेदों की रचना का समय भी हज़ारों साल लम्बा है। इस बीच में मनुष्य ने प्रकृति पर विजय प्राप्त की और विभिन्न दिशाओं में उनकी विचार-शक्ति का जो विकास हुआ, उस बारे में विवेकानन्द लिखते हैं: